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तिष्ठदगु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तिष्ठदगु संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह काल जिसमें गौएँ चरकर अपने खूँटे पर आ जाती हैं । संध्या । सायंकाल । गोधुली ।