तिसटना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]तिसटना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ तिष्ठ] स्थित रहना । उ॰—ज्यौरै थोड़ा सैंण जग, वैरी वणा वसंत । तिसटै दिन थोड़ा तिके, आखै अंत असंत ।—बाँकी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ६६ ।
तिसटना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ तिष्ठ] स्थित रहना । उ॰—ज्यौरै थोड़ा सैंण जग, वैरी वणा वसंत । तिसटै दिन थोड़ा तिके, आखै अंत असंत ।—बाँकी॰ ग्रं॰, भा॰ १, पृ॰ ६६ ।