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तिसाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तिसाना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ तृषा] प्यासा होना । तृषित होना । उ॰—देखि के विभूति सुख उपज्यो अभूत कोऊ चल्यो मुख माधुरी के लोचन तिसाये हैं ।—प्रिया (शब्द॰) ।