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तुंगक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तुंगक संज्ञा पुं॰ [सं॰ तुङ्गक]

१. पुन्नाग वृक्ष । नागकेसर ।

२. महाभारत के अनुसार एक तिर्थ । विशेष—पहले यहीं सारस्वत मुनि ऋषियों को वेद पढ़ाया करते थे । एक बार जब वेद नष्ट हो गए, तब अंगिरा के पुत्र ने एक 'औ३म्' शब्द का उच्चारण किया । इस शब्द के उच्चारण के साथ ही भूला हुआ सब वैद उपस्थित हो गया । इस वटवा के उपलक्ष्य में इस स्थान पर ऋषियों और देवताओं के बड़ा भारी यज्ञ किया था ।