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तृणारणि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तृणारणि न्याय संज्ञा पुं॰ [सं॰] तृण और अरणी रूप स्वतंत्र कारणों के समान व्यवस्था । विशेष—अग्नि के उत्पन् होने में तृण और अरणी दोनों कारण तो हैं पर परस्पर निरपेक्ष अर्थात् अलग अलग कारण हैं । हैं । अरणी से आग उत्पन्न होने का कारण दूसरा है और तृण में आग लगने का कारण दूसरा ।