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तेखना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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तेखना ^१पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ तीक्ष्ण, हिं॰ तेहा] बिगड़ना । क्रुद्ध होना । नाराज होना । उ॰—उ॰ (क) सुंभ बोल्यो तबै भैम सों तेखि कै । लाल नैना धरे वक्रता देखि कै ।—गोपाल (शब्द॰) । (ख) हनुमान या कौन बलाय बसी कछु पूछे ते ना तुम तेखियो री । हित मानि हमारो हमारे कहे भला मो मुख की छबि देखियो री ।—हनुमान (शब्द॰) । (ग) मोही को झूँठी कहौं झगरो करि सौंह करौं तब और ऊ तेखौ । बैठे हैं दोऊ बगीचे में जायकै पाई परों अब आइकै देखौ ।— रघुराज (शब्द॰) ।

तेखना ^२पु क्रि॰ अ॰ [हिं॰] प्रसन्न होना । उमंग में आना । उ॰—डारत अतर लगाइ अरगजा रँगिली समधिन तेखि ।— पृ॰ ३८० ।