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त्यौनार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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त्यौनार संज्ञा पुं॰ [हिं॰, (देश॰)]

१. ढंग । तर्ज । उ॰— (क) आए हैं मनुहारि हित धारि अपूर बहार । लखि जीके नीके सुखद ये पीके त्यौनार ।— श्रृं॰ सत॰ (शब्द॰) । (ख) रहौ गुही बेनी लखैं गुहिबे के त्यौनार । लागे नीर चुचावने नीठि सुखाए बार ।— बिहारी (शब्द॰) । किसी कार्य को विशेष कुशलता के साथ करने की योग्यता ।