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त्रिपुर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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त्रिपुर संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. बाणासुर का एक नाम ।

२. तीनों लोक ।

३. चंदेरी नगर ।—(डिं॰) ।

४. महाभारत के अनुसार वे तीनों नगर जो तारकासूर के तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली नाम के तीनों दैत्यों मै मय दानव से अपने लिये बनवाए थे । विशेष—इनमें से एक नगर सोने का और स्वर्ग में था, दूसरा अंतरिक्ष में चाँदी का था और तीसरा मर्त्यलोक में लोहे का था । जब उक्त तीनों असुरों का अत्याचार और उपद्रव बहुत बढ़ गया तब देवताओं के प्रार्थना करने पर शिव जी ने एक ही बाण से उन तीनों नगरों को नष्ट कर दिया और पीछे से उन तीनों राक्षसों को मार डाला ।