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त्रिपुरभैरव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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त्रिपुरभैरव संज्ञा पुं॰ [सं॰] वैद्यक का एक रस जो सन्निपात रोग में दिया जाता है । विशेष—इसके बनाने की विधि यह है—काली मिर्च ४ भर, सोंठ ४ भर, शुदध तेलिया सोहागा ३ भर, और शुद्ध सींगी मोहरा १ भर लेते हैं और इन सब चीजों को पीसकर पहले तीन दिन तक नीबू के रस में फिर पाँच दिन तक अदरक के रस में और तब तीन दिन तक पान के रस में अच्छी तरह खरल करके एक एक रत्ती की गोलियाँ बना लेते हैं । यह गोली अदरक के रस के साथ दी जाती है ।