त्रिपुष्कर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]त्रिपुष्कर संज्ञा पुं॰ [सं॰] फलित ज्योतिष में एक योग जो पुनर्वसु, उत्तराषाढा, कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, पूर्वभाद्रपद और विशाखा इन नक्षत्रों, रवि, मंगल और शनि इन तिथियों में से किसी एक नक्षत्र एक बार और एक तिथि के एक साथ पड़ने से होता है । विशेष—इस योग में यदि कोई मरे तो उसके परिवार में दो आदमी और मरते हैं और उसके संबंधियों को उनेक प्रकार के कष्ट होते है । इसमें यदि कोई हानि हो तो वैसी ही हानि और दो बार होती है और यदि लाभ हो तो वैसा ही लाभ और दो बार होता है । बालक के जन्म के लिये यह योग जारज योग समझा जाता है ।