त्रिसंक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]त्रिसंक संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'त्रिशंकु' । उ॰—कमल भवाज त्रिसंक वह बध चम आदि सदैव । होहि हलंत कदापि नहि, आइ करे जो दैव ।—पौद्दार अभि॰ ग्रं॰, पृ॰ ५३४ ।
त्रिसंक संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'त्रिशंकु' । उ॰—कमल भवाज त्रिसंक वह बध चम आदि सदैव । होहि हलंत कदापि नहि, आइ करे जो दैव ।—पौद्दार अभि॰ ग्रं॰, पृ॰ ५३४ ।