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त्रैलोक्यचिन्तामणि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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त्रैलोक्यचिंतामणि संज्ञा पुं॰ [सं॰ त्रैलोक्यचिन्तामणि]

१. वैद्यक में एक प्रकार का रस जो सोने, चाँदी और अभ्रक के मेल से बनाया जाता है । विशेष—इसका व्यवहार क्षय, खाँसी, प्रमेह, जीर्णज्वर और उन्माद आदि रोगों में किया जाता है ।

२. वैद्यक में एक प्रकार का रस जो हीरे, सोने और मोती के संयोग से बनाया जाता है ।