थंभन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

थंभन संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्तम्भन]

१. रुकावट । ठहराव ।

२. तंत्र के छह प्रयोगों में से एक । दे॰ 'स्तंभन' ।

३. वह ओषध जो शरीर से निकलनेवाली वस्तु (जैसे, मल, मूत्र, शुक्र इत्यादि) को रोके रहे । यौ॰— जलथंभन = वह मंत्रप्रयोग जिसके द्वारा जल का प्रवाह या बरसना आदि रोक दिया जाय । महिथंभन = धरती को स्थिर रखना । पृथ्वी को रोकना । पृथ्वी को थँभाना या थहाना । उ॰— अमरित पय नित स्रवहि बच्छ महिथंभन जावाहिं । हिंदुहिं मधुर न देहिं कटुक तुरकाहि न पियावहिं ।—अकबरी॰, पृ॰ ३३३ ।