दधिसुत
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]दधिसुत ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ उदधि + सुत]
१. कमल । उ॰—देखो मैं दधिसुत में दधिजात । एक अचंभी देखि सखी री रिपु मैं रिपु जुसमात ।—सूर॰, १० । १७२
२. मुक्ता । मोती । उ॰—दधि- सुत जामे नंद दुवार । निरखि नैन अरुभयौ मनमोहन रटत देहु कर बारंबार ।—सूर॰, १० ।१७३ ।
३. उडुपति । चंद्रमा । उ॰—(क) राधे दधिसुत क्थों न दुरावति । हौं जु कहति बृषभान नंदिनी काहै जीव सतावति ।—सूर॰, १० ।१७१४ । (ख) दधिसुत जात हौं उहिं देस । द्वारिका हैं स्याम सुंदर सकल भुवन नरेस ।—सूर॰, १० ।४२६४ । यौ॰—दधिसुत सुत = चंद्रमा का पुत्र, बुध, अर्थात् विद्वान् । पंडित । उ॰—जिनके हरि वाहन नहीं दधिसुत सुत जेहि नाहिं । तुलसी ते नर तुच्छ है बिना समीर उड़ाहिं ।—स॰ सप्तक, पृ॰ २१ ।
४. जालंधर दैत्य । उ॰—विष्णु वचन चपला प्रतिहारा । तेहि ते आपुन दधिसुत मारा ।—विश्राम (शब्द॰) ।
५. विष । जहर उ॰—नहिं विभूति दधिसुत न कंठ यह चंदन चरचित तन ।—सूर (शब्द॰) ।
दधिसुत ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰] मक्खन । नवनीत ।