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दशयोगभंग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दशयोगभंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ दशयोगभङ्ग] फलित ज्यौतिष में एक नक्षत्रवेध जिसमें विवाह आदि शुभक्रम नहीं किए जाते । विशेष—जिश नक्षत्र में सूर्य हो और जिस नक्षत्र में कर्म होनेवाला हो, दोनों नक्षत्रों के जो स्थान गणनाक्रम मे हों उन्हैं जोड़ डाले । यदि जोड़ पंद्रह, चार, ग्यारह, उन्नीस, सत्ताइस, अठारह या बीस आवे तो दशयोगभंग होगा ।