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दशांग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दशांग संज्ञा पुं॰ [सं॰ दशाङ्ग] पूजन में सुगंध के निमित्त जलाने का एक धूप जो दस सुगंध द्रव्यों के मेल से बनता है । विशेष—यह धूप कई प्रकार से भिन्न भिन्न द्रव्यों के मेल से बनता है । एक रीति के अनुसार दस द्रव्य ये हैं—शिलारस, गुग्गुल, चंदन, जटामासी, लोबान, राल, खस, नख, भीमसेनी कपूर और कस्तूरी । दूसरी रीति के अनुसार मधु, नागरमोथा, घी, चंदन, गुग्गुल, अगर, शिलाजतु, सलई का धूप, गुड़ और पीली सरसों । तीसरी रीति गुग्गुल, गंधक, चंदन, जटामासी, सतावरि, सज्जी, खस, घी, कपूर और कस्तूरी ।

दशांग क्वाथ संज्ञा पुं॰ [सं॰ दशाङ्गक्वाथ] दस ओषधियों का काढ़ा । विशेष—इस काढ़े में निम्नांकित १० ओषधियाँ प्रयुक्त होती हैं— (१) अडूसा, (२) गुर्च, (३) पितपापड़ा, (४) चिरायता, (५) नीम की छाल, (६) जलभंग, (७) हड़, (८) बहेड़ा, (९) आँवला, और (१०) कुलथी । इनके क्वाथ में मधु डाल— कर पिलाने से अम्लपित्त नष्ट होता है ।