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दशार्ण

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दशार्ण संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. विंध्य पर्वत के पूर्व दक्षिण की ओर स्थित उस प्रदेश का प्राचीन नाम जिससे होकर धसान नदी बहती है । विशेष—मेघदूत से पता चलता है कि विदिशा (आधुनिक भिलसा) इसी प्रदेश की राजधानी थी । टालमी ने इस प्रदेश का नाम दोसारन (dosaron) लिखा है ।

२. उक्त देश का निवासी या राजा ।

३. तंत्र का एक दशाक्षर मंत्र ।

३. जैन पुराण के अनुसार एक राजा । विशेष—इस राजा ने तीर्थकर के दर्शन के निमित्त जाकर अभिमान किया था । तीर्थंकर के प्रताप से उसे वहाँ १६, ७७, ७२, १६, ॰॰० इंद्र और १३, ३७, ॰५, ७२, ८०, ॰॰, ॰॰, ॰॰० इंद्राणियाँ दिखाई पड़ी और उसका गर्व चूर्ण हो गया ।