दही

विक्षनरी से
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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

दही संज्ञा पुं॰ [सं॰ दधि] खटाई के द्वारा जमाया हुआ दूध । वह दूध जो खटाई पड़ जाने के कारण जमकर जमकर थक्के के रूप में हो गया हो । विशेष—मिट्टी के बरतन में रखे हुए गरम दूध में थोड़ा सा दही (या और कोई खट्टा पदार्थ) डाल देते हैं; जिससे थोड़ी देर में वह थक्के के रुप में जम जाता है । पाश्चात्य देशों की विधि के अनुसार दूध जमाने के लिये लैक्टिक एसिड का प्रयोग किया जाता है । दही दो प्रकार का होता है । एक सजाव या मीठा जिसका घी या मक्खन निकाला हुआ नहीं होता और जिसमें घी से युक्त मलाई की तह होती है । दूसरा छिनुवा या पनिया जो मक्खन निकाले हुए दूध को जमाने से बनता हे और घटिया होता है । घी दही को मथकर ही निकाला जाता है । हिंदुओं के यहाँ दही मंगल द्रब्यों में से है । वैद्यक में दही अग्निदीपक, स्निग्ध, गुरु, धारक, रक्तपित्तकारक, बलकारक, शुक्रवर्धक, कफवर्धक, तथा मूत्रकृच्छ, अरुचि, अतीसार, विषमज्वर इत्यादि की दूर करनेवाला माना जाता है । यूरप के बड़े बड़े डाक्टरों ने हाल में परीक्षा द्वारा सिद्ध किया है कि दही से बढ़कर और कोई आयुवर्धक पदार्थ मनुष्य के लिये नहीं है । उतरती अवस्था में इसका सेवन उन्होंने अत्यंत उपकारी बतलाया है । उनका कथन है कि दही से शरीर में ऐसे कीटाणु उत्पन्न हो जाते है जो रक्त क्षीण करनेवाले कीटाणुओं को खाते जाते हैं । मुहा॰—दही का तोड़ = दही का पानी जो कपड़े में रखकर दही को निचोड़ने से निकलता है । (हाथ या मुँह में) दही जमा रहना = (१) किसी का तुरंत प्रतिकार न करना, चुप रह जाना । (२) किसी घटना या चर्चा के संबंध मे एकदम मौन हो जाना, कुछ भी न कहना । दही दही = दहिंगल नाम की चिड़िया की बोली । दही दही करना = किसी चीज को मोल लेने के लिये लोगों से कहते फिरना ।