सामग्री पर जाएँ

दाघ

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

दाघ संज्ञा पुं॰ [सं॰] गरमी । ताप । दाह । जलन । उ॰—(क) कहलाने एकत रहत अहि मयूर मृग बाघ । जगत तपोबन सो कियो दीरघ दाघ निदाघ ।—बिहारी (शब्द॰) । (ख) बादि ही चंदन चारु धिसै घनसार घनों धसि पंक बनावत । बादि उसीर समीर चहै दिन रैनि पुरैनि के पात बिछावत । आपुहिं ताप मिटी द्विजदेव सुदाघ निदाघ कि कौन कहावत । बावरि तू नहिं जानति आज मयंक लजावत मोहन आवत ।— द्विजदेव (शब्द॰) ।