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दादू

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दादू † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ दादा]

१. दादा के लिये संबोधन या प्यार का शब्द ।

२. 'भाई' आदि के समान एक साधारण संबोधन ।

३. एक साधु का नाम जिसके नाम पर एक पंथ चला है । विशेष—ऐसा प्रसिद्ध है कि दादु अहमदाबाद के एक धुनियाँ थे । १२ वर्ष की अवस्था ही में इन्होंने अपना नगर पिरत्याग किया और अजमेर, कल्याणपुर आदि स्थानों में कुछ दिनों रहकर अंत में ३७ वर्ष की अवस्था में जयपुर से बीस कोस पर 'नरैन' (नराणा) नामक स्थान में निवास किया । कहते हैं, यहाँ उन्हें आकाशवाणी हुई, जिसके पीछे ये बहुत दिनों तक गुप्त रहे । कबीरपंथियों में प्रसिद्ध है कि दादू कबरपंथी थे और गुरुपरंपरा में कबीर से छठे थे । दादू ने भी कबीर के समान ही राम नाम के रूप में निर्गुण परब्रह्म की उपासना चलाई है । अकबर के समय में दादू अच्छे पहुँचे हुए साधुओं में गिने जाते थे ।