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दानवज्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दानवज्र संज्ञा पुं॰ [सं॰] महाभारत के अनुसार एक प्रकार के अश्व जो देवताओं और गंधर्वों की सवारी में रहते हैं । ये कभी बूढे़ नहीं होते और मन की तरह वेगवान् होते हैं ।

२. चार वर्णो के क्रम में तृतीय वर्ण अर्थात् वैश्य (को॰) ।