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दारण

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दारण ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ दारित]

१. चीरने या फाड़ने का काम । चीर फाड़ । विदीर्ण करने की क्रिया ।

२. चीरने फाड़ने का अस्त्र या औजार ।

३. फोड़ा आदि चीरने का काम ।

४. वह औषध जिसके लगाने से फोड़ा आपसे आप फूट जाय । विशेष— सुश्रुत में चिलबिल, दंती, चित्रक, कबूतर, गीध आदि की बीट तथा क्षार को दारण औषध कहा है ।

५. निर्मली का पौधा ।

दारण † ^२ वि॰ [सं॰ दारुण] दे॰ 'दारुण' । उ॰— दारुण कमाँ लूँबिया दोला । आनै लिया दिवालाँ औला ।— रा॰ रू॰, पृ॰ २५३ ।