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दारुक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दारुक संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. देवदारु ।

२. श्रीकृष्ण के सारथी का नाम । विशेष— ये बड़े कृष्णभक्त थे । सुभद्राहरण के समय इन्होंने अर्जुन से कहा था कि मुझे बाँधकर तब आप सुभद्रा को रथ पर ले जाइए; मैं यादवों के विरुद्ध रथ नहीं हाँक सकता । कृष्ण के स्वर्गवास का समाचार अर्जुन को इन्हों ने दिया था ।

३. काठ का पुतला ।

४. योगाचार्य जो शिव के अवतार कहे जाते हैं ।— भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ४४७ ।