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दिक्साधन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दिक्साधन संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह उपाय जिससे दिशाओं का ज्ञान हो । जैसे, जिस ओर सूर्य उदय होता हो उस ओर मुँह करके खडे़ होना और तब यह समझना कि सामने पूरब, पीछे पश्चिम, दाहिनी ओर दक्षिण और बाई और उत्तर है; अथवा कुछ विशेष नियमों के अनुसार धूप में समवृत्त बनाकर और उसमें लकड़ी आदि गाड़कर उस की छाया से दिशा का पता लगाना । सूर्यसिद्धांत आदि प्राचीन ग्रंथों में इस प्रकार दिक्साधन की कई विधियाँ लिखी हैं ।