दिल्ली

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नामवाचक संज्ञा

  1. भारत के उत्तरी भाग में स्थित एक महानगर जिसके भीतर देश की राजधानी नई दिल्ली भी समाहित है।

अनुवाद

प्रकाशितकोशों से अर्थ

शब्दसागर

दिल्ली संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] जमुना नदी के किनारे बसा हुआ उत्तरपश्चिम भारत का एक बहुत प्रसिद्ध और प्राचीन नगर जो स्वतंत्र भारत की राजधानी है । विशेष—यह नगर बहुत दिनों तक हिंदू राजओं और मुसलमान बादशाहों की राजधानी था और सन् १९१२ ई॰ में फिर ब्रिटिश भारत की भी राजधानी हो गया । जिस स्थान पर वर्तमान दिल्ली नगर है उसके चारों ओर १०—१२ मील के घेरे में भिन्न भिन्न स्थोनों में यह नगर कई बार बसा और कई बार उजड़ा । कुछ लोगों का मत है की इंद्रप्रस्थ के मयूर- वंशी अंतिम राजा दिलू ने इसे पहले पहल बसाया था, इसी से इसका नाम दिल्ली पड़ा । यह भी प्रवाद है कि पृथ्वीराज के नाना अनंगपाल ने एक बार एक गढ़ बनवाना चाहा था । उसकी नींव रखने के समय उनके पुरोहित ने अच्छे मुहूर्त में लोहे की एक कील पृथ्वी में गाड़ दी और कहा कि यह कील शेषनाग के मस्तक पर जा लगी है जिसके कारण आपके तोंअर वंश का राज्य अचल हो गया । राजा को इस बात पर विश्वास न हुआ और उन्होंने वह कील उखड़वा दी । कील उखाड़ते ही वहाँ से लहू की धारा निकलने लगी । इसपर राजा को बहुत पश्चाताप हुआ । उन्होंने फिर वही कील उस स्थान पर गड़वाई पर इस बार वह ठीक नहीं बैठी, कुछ ढीली रह गई । इसी से उस स्थान का नाम 'ढीली' पड़ गया जो बिगड़कर दिल्ली हो गया । पर कील या स्तंभ पर जो शिलालेख है उससे इस प्रवाद का पूरा खंडन हो जाता है क्योंकि उसमें अनंगपाल से बहुत पहले के किसी चंद्र नामक राजा (शायद चंद्रगुप्त विक्रमादित्य) की प्रशंसा है । पृथ्विराज रासो के अनुसार अनगपाल के किसी पूर्वपुरुष 'कल्हन' नाम के नरेश ने यह किल्ली गड़वाई और नगर बसाया था । उसके बाद अनंगपाल ने फिर किल्ली गड़वाई (दे॰ पृथ्वीराज रासो 'दिल्ली किल्ली कथा') । नाम के विषय में चाहे जो हो, पर इसमें संदेह नहीं कि ईसवी पहली शताब्दी के बाद से यह नगर कई बार बसा और उजड़ा । सन् ११९३ में मुहम्मद गोरी ने इस नगर पर अधिकार कर लिया । तभी से यह मुसलमान बादशाहों की राजधानी हो गया । सन् १३९८ में इसे तैमूर ने ध्वंस किया और १५२६ में बाबर ने इसपर अधिकार किया । तब से यहाँ मोगल साम्राज्य की राजधानी हो गई । सन् १८०३ में इसपर अँगरेजों का अधिकार हो गया । पहले अँगरेजी भारत की राजधानी कलकत्ते में थी; पर सन् १९१२ से उठकर दिल्ली चली गई । आजकल वर्तमान दिल्ली के पास एक नई दिल्ली बस गई है ।