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दीप्ताग्नि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दीप्ताग्नि ^१ वि॰ [सं॰]

१. जिसकी जठराग्नि बहुत तीब्र हो । जिसकी पाचन शक्ति अत्यंत प्रबल हो ।

२. जिसकी भूख जगी हो । भूखा ।

दीप्ताग्नि ^२ संज्ञा पुं॰ अगस्त्य मुनि (जिन्होंने समूद्र को पी लिया था और वातापि नामक राक्षम को पचा डाला था) ।