दुचितई
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]दुचितई †पु संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ दुचित]
१. एक बात पर चित्त के न जमने की क्रिया या भाव । चित्त की अस्थिरता । दुबिधा । उ॰—सोचत जनक पोच पेंच परि गई है । जोरि करकमल निहोरि कहैं कौसिक सों, आयसु भो राम को सो मेरे दुचितई है ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ३१३ ।
२. खटका । आशंका । चिंता । उ॰—शाह सुवन हरि रति बाढ़ी । तासु विछोह दुचितई गाढ़ी ।—रघुराज (शब्द॰) ।