दुद्धी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]दुद्धी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ दुग्धी]
१. जमीन पर फैलनेवाली एक घास । विशेष—इस घास के डंठलों में थोड़ी थोड़ी दूर पर गाँठें होती हैं जिनके दोनों ओर एक एक पत्नी होती है । इन्हीं गाँठों पर से पतले डंठल निकलते हैं जिनमें फूलों के गोल गोल गुच्छे लगते हैं । दुद्धी दो प्रकार की होती है—एक बड़ी दूसरी छोटी । बड़ी वृद्धी की सुत्ती दो ढाई अंगुल लंबी, एक अंगुल चौड़ी तथा किनारे पर कुछ कुछ कटावदार होती है । अगले सिरे की ओर यह नुकीली और पीछे डंठल की ओर गोल और चौड़ी होती है । छोटे दुद्धी के डंठल बहुत पतले और लाल होते हैं । प्रतियाँ भी बहुत महीन और दोनों सिरों पर गोल होती हैं । वैद्यक में दुद्धी गरम, भारी रूखी, बादी, कड़ुई, मलमूत्र को निकालनेवाली तथा कोढ़, और कृमि को दूर करनेवाली मानी जाती है । बड़ी दुद्धी से लड़के गोदना गोदने का खेल भी खेलते हैं । वे इसके दू ध से कुछ लिखकर उसपर कोयला घिसते हैं जिससे काले चिह्न बन जाते हैं । पर्या॰—क्षीरी । मरुदभवा । ग्राहिणी । कच्छरा । ताम्रमूला । २ थूहर की जाति का एक छोटा पौधा, जो भारतवर्ष के सब गरम प्रदेशों में, विशेषकर पंजाब और राजपूताने में होता है । इसका दूध दमें में दिया जाता है ।
दुद्धी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ दूध]
१. एक प्रकार की सफेद मिट्टी । खड़िया मिट्टी ।
२. सारिवा लता ।
३. जंगली नील ।
४. एक पेड़ जो मद्रास, मध्य प्रदेश और राजपूताने में होता है । इसकी लकड़ी सफेद और बहुत अच्छी होती है और बहुत से कामों में आती है ।
दुद्धी ^३ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ दूध] एक प्रकार का सफेद धान, जिसका नाम सुश्रुत ने कुक्कुटांडक लिखा है । विशेष—दे॰ 'दुधिया' ।