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दुराना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दुराना क्रि॰ अ॰ [हिं॰ दूर]

१. दूर होना । हटना । टलना । भागना । उ॰—यद्यपि सूर प्रताप श्याम कौ दूरि दुरात ।— सूर (शब्द॰) ।

२. छिपना । आड़ में होना । अलक्षित होना । उ॰—श्री वृषभानु नंदिनी ललिता दोऊ वा मग जात । तमहूँ जाय माधुरी कुंजन पहिलेहि क्यों न दुरात ।— हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।

दुराना क्रि॰ स॰

१. दूर करना । हटाना । उ॰—रे भौया, केवट ! ले उतराई । रघुपति महाराज इत ठाढ़े तैं कहँ नाव दुराई ।— सूर (शब्द॰) ।

२. छोड़ना । त्यागना । न रखना । उ॰— भजहु कृपानिधि कपट दुराई ।—सूर॰ (शब्द॰) ।

३. छिपाना । गुप्त रखना । प्रकट न करना । उ॰—(क) तुम तो तीन लोक के ठाकुर तुम तें कहा दुराइए ।—सूर (शब्द॰) । (ख) बैरु प्रीति नहि दुरइ दुराएँ ।—मानस, २ ।१ ३ ।