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दुराव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दुराव संज्ञा पुं॰ [हिं॰ दुराना] किसी बात को दूसरे से छिपाने का भाव । अविश्वास या भय के कारण किसी से बात गुप्त रखने का भाव । उ॰—सती कीन्ह चह तहँहुँ दुराऊ । देखहु नारि सुभाउ प्रभाऊ ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. कपट । छल । उ॰—भरत सपथ तोहिं सत्य कहु परिहरि कपट दुराउ । हरष समय विसमय करसि कारन मोहि सुनाउ ।—तुलसी (शब्द॰) ।