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दुर्मिल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दुर्मिल संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. भरत के सातवें लड़के का नाम ।

२. एक छंद जिसके प्रत्येक चरण में १०, ८ आर १४ के विराम से ३२ मात्राएँ होती हैं । अंत में एक सगण और दो गुरु होते हैं । इसमें जगण का निषेध है । जैसे—जय जय रघुनदन असुर- विखंडन, कुलमंडन यश के धारी । जनमन सुखकारी, विपिन- विहारी, नारि अहिल्याहि सी तारी ।

३. एक वर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में आठ सगण होते हैं । यह एक प्रकार का सवैया है । जैसे,—सबसों करि नेह भजै रघुनंदन राजत हीरन माल हिये ।

दुर्मिल ^२ वि॰ [सं॰]

१. जिसे प्राप्त करना कठिन हो । कठिनता से मिलनेवाला दुर्लभ । उ॰—दुर्मिल जो कुछ ऊर्मिल मिल मिलकर हुआ आखिल ।—अर्चना, पृ॰ १० ।

२. जो मेल का न हो । अनमिल ।