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दुर्वासा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दुर्वासा संज्ञा पुं॰ [सं॰ दुर्वासिस्] एक मुनि जो अत्रि के पुत्र थे । विशेष—इनके नाम के विषय में महाभारत में लिखा है कि जिसका धर्म में दृढ़ निश्चय हो उसे दुर्वासा कहते हैं । ये अत्यंत क्रोधी थे । इन्होंनी और्व मुनि की कन्या कंदला से विवाह किया था । विवाह के समय इन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि स्त्री के सौ अपराद क्षमा करेंगे । प्रतिज्ञानुसार इन्होंने सौ अपराध तक क्षमा किए, अनंतर शाप देकर पत्नी को भस्म कर दिया । और्व मुनि ने कन्या के शाप से शोकातुर होकर शाप दिया कि तुम्हारा दर्प चूर्ण होगा । इसी शाप के कारण राजा अंबरीष के मामले में इन्हें नीचा देखना पड़ा । इनका स्वभाव कुछ सनकी था । इनके शाप तथा बरदान की अनेक कथाएँ महाभारत तथा पुराणादि में भरी पड़ी हैं ।