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दुष्टव्रण

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दुष्टव्रण संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह व्रण अथवा धाव जिसमें से दुर्गंध आवे और जो अच्छा न हो । विशेष—यह रोग वैद्यक में असाध्य मान गया है और धर्मशास्त्र में इस रोग को पूर्वजन्मकृत महापातक का फल माना है । बिना प्रायश्चित किए एस रोग का रोगी अस्पृश्य माना गया है और उसके दाहकर्म और मृतक संस्कार का निषेध है ।

२. नासूर । नाडीव्रण (को॰) ।