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दुष्योदर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दुष्योदर संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक उदर रोग जो आदि पशुओं के नख और रोएँ अथवा मल, मूत्र, आर्तवमिश्रित अन्न या एक साथ मिला हुआ घी और मधु खाने तथा गंदा पानी पीने से होता है । विशेष—इसमें त्रिदोष के कारण रोगी दिन दिन दुबला और पीला हो जाता है । उसके शरीर में जलन होती है और कभी कभी उसे मूर्छा भी आती है । जब बदली होता है और दिन खराब रहता है तब यह रोग प्राय: उभरता है ।