दृक्काण
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]दृक्काण संज्ञा पुं॰ [यू॰ डेकानस, तुल॰ सं॰ द्रेक्काण] फलित ज्योतिष में एक राशि का तीसरा भाग जो दश अंशो का होता है । विशेष—प्रत्येक राशि तीस अंशों की होती है । राशि को तीन भागों में विभक्त करके एक एक भाग को दृक्काण कहते हैं । इस प्रकार किसी एक राशि में प्रथम, द्वितीय और तृतिय तीन दृक्काण होते हैं । उस राशि का ही अधिपति प्रथम दृक्काण का स्वामी होता है, उससे पाँचवीं राशि का द्वितिय दृक्काण का, और इससे नवीं राशि का तृतिय दृक्काण का । जैसे, मेष राशि का स्वामी मंगल है । अतः मेष राशि के प्रथम दृक्काण का स्वामी मंगल, द्वितिय दृक्काण का रवि, (जो मेष से पाँचवीं राशि, सिंह का स्वामी है) और तृतीया दृक्काण का बृहस्पति (जो मेष से नवीं राशि, धनु, का स्वामी है) होगा । यह दृक्काण फलित ज्योतिष में काम आता है । शुभ ग्रहों के दृक्काण का नाम 'जल' और अशुभ ग्रहों के के दृक्काण का 'दहन' है । जल दृक्काण में जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु जल में होती है और दहन दृक्काण में जिसका जन्म होता है उसकी मृत्यु अग्नि से होता है । राशियों के अनुसार दृक्काणों के अनेक नाम कल्पित किए गए हैं ।