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दृष्टिबन्ध

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दृष्टिबंध संज्ञा पुं॰ [सं॰ दृष्टिबन्ध]

१. वह क्रिया जिससे देखनेवालों की दृष्टि में भ्रम हो जाय । दीठबंदी । इंद्रजाल । माया । जादू ।

२. चालाकी । हाथ की सफाई । हस्तलाघव । उ॰—राघौ दृष्टिबंध कल्हि खेला । सभा माँझ चेटक अस मेला ।—जायसी (शब्द॰) ।