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देवकूट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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देवकूट संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. कुबेर के आठ पुत्रों में से एक, जो शिव- पूजन के लिये सूँघकर कमल ले गया था जिसके कारण वह कंस का भाई हुआ और श्रीकृष्ण चंद्र द्बारा मारा गया ।

२. एक पवित्र आश्रम जो वसिष्ठ के आश्रम के निकट था । (महाभारत) ।