देवताड़
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]देवताड़ संज्ञा पुं॰ [सं॰ देवताड]
१. एक प्रकार का तुण या पौधा जिसमें इधर उधर टहनियाँ नहीं निकलतीं, तलवार की तरह वो ढाई हाथ तक लंबे सीधे पत्ते पेड़ी से चारों ओर निकलते हैं । विशेष—यह पौधा अपने लंबे और कड़े पत्ते के कारण देखने में धीकुँवार के पौधे सा मालूम होता है । इस पौधे के पत्ते कड़े और कुछ नीलापन लिए होते है । इसके बीच का कांड डंडे की तरह छह सात हाथ ऊपर निकल जाता है जिसके सिरे पर फूलों के गुच्छे लगते हैं । पत्तों के रेशों से बहुत मजबूत रस्से बनते हैं । इसे रामबाँस भी कहते हैं ।
२. दे॰ 'देवताड़ी' ।
३. राहु (को॰) ।
४. अग्नि (को॰) ।