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देववाद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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देववाद संज्ञा पुं॰ [सं॰ देव + वाद] वह वाद या मत जिसके अनुसार प्राकृतिक दृश्यों और वस्तुओं में देवत्व की कल्पना की जाती हैं । उ॰—प्राचीन आर्य काव्य में—क्या भारत के क्या योरप के—रहस्यवाद का नाम तक नहीं, सीधा देववाद है ।—चितामणि, भा॰ २, पृ॰ १३८ ।