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देवशुनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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देवशुनी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] देवलोक की कुतिया, सरमा । विशेष—इस देवशुनी की कथा महाभारत में इस प्रकार लिखी हे,—राजा जनमेजय कोई बडा़ यज्ञ कर रहे थे । इसी बीच एक कुत्ता वहाँ आया । जनमेजय के भाइयों ने उसे मारकर भगा दिया । उस कुत्ते ने अपनी माता सरमा से जाकर कहा— 'मैंने कोई अपराध नहीं किया था, यज्ञ की कोई सामग्री नहीं छुई थी, इसपर भी बिना अपराध के लोगों ने मुझे मारा' । देवशुनी सरमा यह सुनकर जनमेजय के पास जाकर बोली— 'मेरे इस पुत्र ने कोई अपराध नहीं किया था । तुम्हारा घी आदि कुछ भी नहीं चाटा था । तुमने मेरे इस पुत्र को बिना अपराध के मारा, इससे तुम्हारे ऊपर अकस्मात् कोई दुःख पडे़गा' । यह शाप देकर देवशुनी चली गई । विशेष— दे॰ 'सरमा' ।