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दे॰

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दे॰ 'प्राणनाथी' । उ॰—धामी एक दूसरे के अभिवादन में परनाम कहतें हैं—इसी कारण ये लोग परनामी भी कहलाते हैं ।—शुक्ल अभि॰ ग्रं॰, पृ॰ ८६ ।

दे॰ 'बकारी' या 'बक्कुर' । उ॰— दुहूँ हाथ गाहि सीस उठावा । पूँछत बात बकुर नहिं आवा ।— चित्रा॰, पृ॰ ६४ ।