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दोद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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दोद पु संज्ञा स्त्री॰ [फा॰] दर्शन । दीदार । उ॰— दीद बरदीद परतीत आवै नहीं, दूरि की आस विश्वास भारी ।—कबीर॰ रे॰, पृ॰ ५ । यौ॰— दीद ए तर = अश्रपूर्ण नेत्र । आर्द्र आखें । दीद बरदीद = देखादेखी । आमने सामने । उ॰— दीद बरदीद हम नजरों देखा अजया अमर निसानी ।— कबीर श॰, पृ॰ ६२ । दीदबान = (१) देखमाल करनेवाला व्यक्ति । (२) निगरानी करने के लिये बना ऊँचा स्थान । दीदवानी = निगरानी । देखभाल । उ॰— करे घर की सब दीदवानी वही, देवे नेको बद की निशानी वही ।— दक्खिनी॰, पृ॰ ८६ ।