द्रिग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]द्रिग पु वि॰ [सं॰ दृक, दृग्] दे॰ 'दृग' । उ॰—वर तर्प चंद अन दर्प करि तामस द्रिग विकरल मन । सम गवरि अंग अँग सिष उसिष नृपति समंतन असुर बन ।—पृ॰ रा॰, १ । ५०५ ।
द्रिग पु वि॰ [सं॰ दृक, दृग्] दे॰ 'दृग' । उ॰—वर तर्प चंद अन दर्प करि तामस द्रिग विकरल मन । सम गवरि अंग अँग सिष उसिष नृपति समंतन असुर बन ।—पृ॰ रा॰, १ । ५०५ ।