द्रुमिला
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]द्रुमिला संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक छंद जिसे प्रत्येक चरण में ३२ मात्राएँ होती हैं । इसके प्रत्येक चरण के अंत में गुरु होता है तथा १० और १८ मात्रा पर यति होती है । जैसे,— उत्तरु यह दैके दूत पठै के असदखान यह रोस भयौ । बौल्यो सब बीरन कुल के धीरन, जिन न चरन रन उलटि धरयौ । तुम करो तयारी सब इस बारी, मैं दिल यह इतकाद करयौ । मुझको तो लरना देर न करना आहइ साह को काज करयौ ।—सूदन (शब्द॰) ।