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द्वन्द्वज

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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द्वंद्वज वि॰ [सं॰ द्वन्द्वज]

१. सुख दुःख राग द्वेष आदि द्वंद्वों से उत्पन्न (मनोवृत्ति) ।

२. कलह से उत्पन्न ।

३. वात, पित्त और कफ नाम के त्रिदोषों में से दो दोषों से उत्पन्न (रोग) । यौ॰— द्वंद्वज गुलम = बात, पित्त और कफ आदि त्रिदोषों में से किन्हीं दो दोषों से उत्पन्न गुल्म रोग । उ॰— गुल्म के मिश्र लक्षण को द्वंद्वज गुल्म कहते हैं ।—माधव॰, पृ॰ १६७ । द्वंद्वज बवासीर = बवासीर नामक रोग जो दो दोषों के कराण होता है । उ॰— दो दो दोषों के कारण और लक्षण मिलें तो द्वंद्वज बवासीर भई ।—माधव, पृ॰ ५४ ।