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द्विकल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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द्विकल संज्ञा पुं॰ [हिं॰ द्वि + कला] छंदशास्त्र या पिंगल में दो मात्राओं का समूह । विशेष— यह दो प्रकार का होता है । एक में तो तीनों मात्राएँ पृथक् पृथक् रहती हैं, जैसे,— जल, चल, बन, धन इत्यादि और दूसरे में एक ही अक्षर दो मात्राओं का होता है जैसे,— खा, जा, ला, आ, का इत्यादि ।