द्वैप
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]द्वैप संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. बाघ से संबंध रखनेवाली या बाध से निकली या बनी हुई वस्तु ।
२. व्याघ्रचर्म । बाघ का चमड़ा ।
३. द्वीप से संबंधित या उत्पन्न (वस्तु आदि) ।
द्वैप संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. बाघ से संबंध रखनेवाली या बाध से निकली या बनी हुई वस्तु ।
२. व्याघ्रचर्म । बाघ का चमड़ा ।
३. द्वीप से संबंधित या उत्पन्न (वस्तु आदि) ।