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धरनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धरनी ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ धरणी] दे॰ 'धरणी' । उ॰—अगनित पूरन ससि मनौ घरनी पर धाबै ।—घनानंद, पृ॰ ४५५ ।

धरनी ^२ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ धारना या सं धारण] किसी बात पर दृढ़तापूर्वक अडे़ रहना । टेक । उ॰—तुलसी अब राम को दास कहाइ हिये धरु चातक की धरनी ।—तुलसी (शब्द॰) ।