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धरनीधर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धरनीधर पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ धरणीधर]

१. शेषनाग । उ॰— तुलसी जिन्हैं धाए धुकै धरनीधर धौर धकानि सों मेरु हले हैं । ते रनतीर्थनि लक्खन लाखन दानि ज्यों दारिद दाबि दले हैं ।—तुलसी ग्रं॰, पृ॰ १९० ।

२. विष्णु या राम । उ॰— जड़ पंच मिलै जेहि देह करो, करनी लख धौं धरनीघर की । जन की कहु क्यों करिहै न सँभार, जो सार करै सचराचर की ।—तुलसी ग्रँ॰, पृ॰ २०४ ।

३. दे॰ 'धरणीधर' ।