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धरहर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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धरहर † ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ धरना + हर (प्रत्य॰)] ।

१. धर पकड़ । लोगों को इस प्रकार पकड़ने का कार्य कि वे इधर उधर भाग न सकें । गिरपतारी । क्रि॰ प्र॰—होना ।

२. दो अधिक लड़नेवालों को धर पकड़कर लड़ाइ गंड करने का कार्य । बीच बिचाव । उ॰—ललित अहिसिलु निकर मनहु ससि सन समर लरत धरहरि करत /?/ जनु जुग फनी ।—तुलसी (शब्द॰) । ३, मारे या कपड़े जाने से बचाने का काम । बचाव । रक्षा ।

४. धैर्य । /?/ । उ॰—सन सूक्यो, बीत्यौ बनौ ऊखौ लई उखारि । हरी हरी अरहर अजौं धर धरहर हिय नारि ।—बिहादी (शब्द॰) ।

धरहर पु ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'धरहरा' । उ॰—धरहर तिप्ते बरषे इंदु ।—प्राण॰, पृ॰ ९९ ।